हर वक़्त हर घड़ी यहाँ हर-सू लिए हुए
बैठा है शख़्स इक तेरा पहलू लिए हुए
दुश्मन को दोस्तों मेरी हिम्मत ने मात दी
मैं लड़ रहा था एक ही बाज़ू लिए हुए
हिस्सा मुझे बनायें किसी और सीन का
अच्छा नहीं लगूँगा मैं चाकू लिए हुए
रस्ता नहीं था और कोई सुल्ह के सिवा
वो आ गया था आँख में आँसू लिए हुए
दुनिया में एक शक्ल के होते हैं सात लोग
कोई तो आए उस की ही ख़ुशबू लिए हुए
— Prashant Sitapuri















