
मुझे पहले समझ फिर कोई अंदाज़ा लगा दोस्त
नहीं समझा तो ख़ुद के आगे आईना लगा दोस्त
बड़ी रफ़्तार से निकला है मेरे दिल से इक शख़्स
नहीं वापस वो आने वाला दरवाज़ा लगा दोस्त
— Prashant Rao chourase
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