ख़्वाब-ओ-ख़याल से बुना ये जाल देख लो
दिल में फ़क़त दबी हुई आमाल देख लो
साया है दिल पे उस का धनी हूँ मैं इस लिए
बे-रब्त-ओ-ज़ब्त वरना ये कंगाल देख लो
पूरा बदन भी सूख गया हिज्र में मिरा
विश्वास गर नहीं है तो ये हाल देख लो
संजीदा मेरे हाल पे गर तुम को शक है तो
बे-नूर मेरे सर में सभी बाल देख लो
मुझ से ये वक़्त जो नया है कटता भी नहीं
ऊपर से सर गुज़िश्ता मिरी चाल देख लो
ख़ुशियों के फ़ाक़ों से मेरी ये रूह मर गई
अब जिस्म पर उदासी की ये खाल देख लो
— Naresh sogarwal 'premi'















