सांसें सांसों में यूँँ ही घुलती मिलती हैं
हौले-हौले रफ़्ता-रफ़्ता धीरे-धीरे
जीवन की गाड़ी ऐसे ही तो चलती है
हौले-हौले रफ़्ता-रफ़्ता धीरे-धीरे
यारों बतलाऊँ वय ये कैसे ढ़लती है
हौले-हौले रफ़्ता-रफ़्ता धीरे-धीरे
As you were reading Shayari by Pawan
our suggestion based on Pawan
As you were reading undefined Shayari