जबसे तुम हो चाहत मेरी
बेहद अच्छी हालत मेरी
जिस दिन उस का माथा चूमा
उस दिन बदली क़िस्मत मेरी
मैं तुम को झुकने कैसे दूँ
आख़िर तुम हो इज़्ज़त मेरी
जैसे पेड़ बिना पक्षी की
ऐसी तुम बिन हालत मेरी
— Kaviraj " Madhukar"
बेहद अच्छी हालत मेरी
जिस दिन उस का माथा चूमा
उस दिन बदली क़िस्मत मेरी
मैं तुम को झुकने कैसे दूँ
आख़िर तुम हो इज़्ज़त मेरी
जैसे पेड़ बिना पक्षी की
ऐसी तुम बिन हालत मेरी
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