ख़बर तो यार ये अच्छी नहीं है
अभी तक वो मुझे समझी नहीं है
मुझे तो बस वही अच्छी लगी है
जिसे सब कह रहे अच्छी नहीं है
तुम्हारी सब कलाएँ जानती है
वो लड़की यार अब बच्ची नहीं है
न जाने क्या उसे हम से गिला है
वो जाने क्यूँ हमें दिखती नहीं है
हमारा तो हुनर बेकार समझो
अगर वो शा'इरी सुनती नहीं है
— Kaviraj " Madhukar"















