"तुम्हें याद तो है ना"

"कुछ ऐसे ही पल थे,
जब हम और तुम मिले थे,
ऐसी ही चाँदनी रात,
ऐसी ही मद्धम बरसात,

हाथों में ले कर हाथ, हम तुम
कुछ दूर तक चले थे
याद है मुझे तुम ने मेरा हाथ अपने सिर पर रख के
क़सम दिलायी थी कि
तुम मुझे छोड़कर कभी नहीं जाओगे
देखो,मैं ने आज तक तुम्हारे वादे को सँभाल रखा है।

उसी रात चाँद के छाव में
खुले आसमान के तले
तुम ने अपने नरम उँगलियों से
मेरे गालों पे अपना नाम लिखकर
मेरा अपना होने का एहसास भी दिलाया था।

सुनो, तुम्हें याद तो है ना

— Rajnish Vishwakarma

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