सच कह रहीं हूँ मुझ को मुहब्बत हुई नहींतस्वीर ये वही है जो मुझ से बनी नहींहर आदमी के दिल में कई राज़ हैं छिपेये दास्ताँ वही जो किसी ने सुनी नहीं— Ritika reet