शीशे में इंसान का गोया लगता हूँ
शुक्र है इसको तो मैं बन्दा लगता हूँ
मेरे दिल से खेल गए जो मेरे दोस्त
उन लोगों को खेल-तमाशा लगता हूँ
कुछ आते हैं और चले जाते हैं फिर
उनको शायद रैन-बसेरा लगता हूँ
मुझको नाकामी ने ये बतलाया है
मैं किन किन लोगों को जाया लगता हूँ
ग़ुस्सा करने पर भी तू चुप रहता है
कौन है तू और मैं तेरा क्या लगता हूँ
जिस हिसाब से देख रहे हो मुझको तुम
ज़ाहिर है तुमको मैं अच्छा लगता हूँ
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