देख कर लगता है क्या नस काटी थी मैं नेहाँ मगर ये भी किया था वाक़ई मैं नेएक दिन वो ख़ूब रोई मेरे रोने पतब से बस हँस के गुज़ारी ज़िंदगी मैं ने— Saahir