आँख गर लड़ यार जाए आँख तुम फिर मत लगाना
इश्क़ का तो काम है सपने दिखाना लत लगाना
भूल से सोना न तुम बेफ़िक्र सस्सी की तरह फिर
यार खो कर फिर से ख़ुद पे तुम नहीं तोहमत लगाना
पार करना इस दफ़ा तुम गर्म सहरा की ज़मीं को
खोज लेना यार अपना इस दफ़ा हिम्मत लगाना
हार कर फिर तुम नहीं सोना दहकती रेत में अब
इश्क़ के माथे पे तुम तोहमत नहीं वसलत लगाना
पार करना हर मुसीबत रेत को मिट्टी बनाना
जो मिले पुन्नू नहीं उस की वहीं मूरत लगाना
— Rubball















