हर रोज़ आश्ना से कई बार जंग हो
जो यार की हो चाह तो सरकार जंग हो
रख दे लबों पे हाथ तो झगड़ा तमाम हो
जब यूँ शिकस्त यार दे त्यौहार जंग हो
करता रहूँ ख़ता वो मिरी फ़िक़्र में रहे
हो यार बा-वफ़ा तो लगातार जंग हो
लड़ता रहे वो मुझ से मिरी ख़ैर के लिए
फिर चाहे सौ दफ़ा हो मज़ेदार जंग हो
तक़रार इब्तिदा हो जो इस रब्त ज़ब्त की
तो है दुआ ये रब से तरफ़ दार जंग हो
— Rubball















