थी बहुत नादान मैं ने आबरू अपनी ये हारी
इश्क़ में पागल हुई मैं और अपनी जान वारी
थी ख़बर मुझ को मगर मैं ने लगा ली चुप लबों पर
वो निभाएगा वफ़ा मुझ को ये झूठी थी ख़ुमारी
मैं ठगी सी रह गई फिर भी नहीं माना मिरा दिल
छल से जैसे छीन ले अपना क़रीबी चीज़ प्यारी
मर गई थी रूह मेरी चल रही थी पर ये साँसें
लाश सी बे-जान मैं ने ज़िंदगी ये है गुज़ारी
जो हुआ सो हो गया अब सोग यूँ करना नहीं है
बस यही फिर सोच कर मैं ने सभी ग़लती सुधारी
ख़ाक सब कर दी निशानी प्यार से जो दी सनम ने
दिल से मैं ने नोच कर तस्वीर उस की है उतारी
— Rubball















