निगाहें लगाए निगह-दार की
ये चिलमन सलामत रहे यार की
हया-दार के मुंतज़िर हैं सभी
तलब है हसीना के दीदार की
के बातों में फिर आ गए यार हम
ये बस एक ग़लती कई-बार की
तवक़्क़ो रज़ा की दिखा कर मुझे
वफ़ा बे-वफ़ा ने लगातार की
मुझे फिर ख़ताकार एलान कर
ये मुजरिम निगाहें गिरफ्तार की
गवारा सितम है मुझे यार सब
के हद मैं ये देखूँ सितम-कार की
— Rubball















