इस बात पर उदास नहीं हम उदास हैं
इस बात पर उदास हैं हर दम उदास हैं
हम तो समझ रहे थे फ़क़त हम उदास हैं
तुम बिन तमाम शहर के मौसम उदास हैं
कुछ दिन से उन की याद नहीं आ रही हमें
कुछ दिन से हम उदास हैं पर कम उदास हैं
दिल पर तेरे दिए हुए ज़ख़्मों को देख कर
ज़ख़्मों पे जो लगे हैं वो मरहम उदास हैं
चेहरा हमारा पढ़ लिया अहल-ए-नज़र ने ख़ुद
हम ने नहीं किसी से कहा हम उदास हैं
क्या जाने क्या हुआ बड़ी हैरत की बात है
पहलू में तेरे बैठ के भी हम उदास हैं
ऐ मौसम-ए-विसाल कहाँ है चला भी आ
वो हैं वहाँ उदास यहाँ हम उदास हैं
— Saif Dehlvi















