जब उस सेे बिगाड़े न गए काम हमारे
तो नाम को करने लगा बदनाम हमारे
जो कहता था हर हाल में हम साथ रहेंगे
वो चल न सका साथ में दो गाम हमारे
दिल तोड़ने वाले तुझे भूले नहीं हैं हम
रहता है ज़ेहन में तू सुब्ह शाम हमारे
वो शख़्स कि जिस से बहुत उम्मीद थी हम को
अफ़्सोस वही आया नहीं काम हमारे
हर शाम ही हम आते हैं ये ठीक नहीं है
आ जाइए घर आप किसी शाम हमारे
कोशिश तो बहुत कि है मगर तुम से बिछड़ के
दिल को कभी आया नहीं आराम हमारे
ऐ सैफ़ तह-ए-दिल से करें शुक्र-ए-ख़ुदा हम
दो चार भी अश'आर हों गर आम हमारे
— Saif Dehlvi















