ये ठीक है कि उन से तुम्हें प्यार हो गया
उन की ज़बान से अगर इनकार हो गया
मेरा यक़ीन कीजिए सरकार हो गया
मैं ने किया नहीं था मुझे प्यार हो गया
थोड़ा बहुत ख़राब था इतना नहीं था मैं
जितना तुम्हारे इश्क़ में बेकार हो गया
अब कोई आरज़ू मिरे दिल में नहीं रही
काफ़ी है मुझ को आप का दीदार हो गया
जिस बे-वफ़ा को इस का ज़रा भी नहीं ख़याल
उस बे-वफ़ा का दिल ये तलबगार हो गया
दुनिया जहाँ में कोई उसे पूछता नहीं
दीवाना तेरा उर्दू का अख़बार हो गया
— Saif Dehlvi















