आसान नहीं करना कोई प्यार मोहब्बत
इंसाँ को भुला देती है संसार मोहब्बत
ज़िन्दा में हो शूमार न मुर्दे में हो शूमार
वो मारती है आदमी को मार मोहब्बत
तुम मेरी मोहब्बत में गली तक नहीं आते
ले आई ज़ुलैख़ा को तो बाज़ार मोहब्बत
तू दूर रह इस से कि बना देती है प्यारे
अच्छे भले इंसान को बीमार मोहब्बत
इंसान को इंसान के मज़हब से न तोलो
इंसान हो इन्साँ से करो प्यार मोहब्बत
ये अहल-ए-मोहब्बत ने ज़माने को बताया
नफ़रत की गिरा देती है दीवार मोहब्बत
एहसास मिरे हाल का हो जाएगा तुझ को
तू सैफ़ ज़रा कर तो ले एक बार मोहब्बत
— Saif Dehlvi















