कुछ सर्द दुपहरी झिलमिल सी कुछ मतवाली सी शाम सही
इन वक़्त की लहरों में यादों का क़तरा तेरे नाम सही
कुछ बंदिश तेरी बाहों की कुछ तेरी साँसों की ख़ुशबू
टावर ब्रिज के गलियारों में तेरी आँखों के ज़ाम सही
मीठी सी नीम ख़मोशी में कुछ गीत यूँ ही गाते-चलते
दिल से दिल तक आते जाते कुछ दिल के ये पैग़ाम सही
कुछ लम्हों में ही जी लेते हैं उम्र 'सलिल' हम बरसों की
बाक़ी बिन तेरे जैसे भी कट जाए वक़्त तमाम सही
— Surendra Bhatia "Salil"















