कहानी वो ही होती है
कहानी जो भी हो चाहे कहानी वो ही होती है
वही लड़का वही लड़की जवानी वो ही होती है
बदलते वक़्त में केवल हवा तब्दील होती है
वो मिलने की बिछड़ने की अदा तब्दील होती है
तड़प उतनी ही होती है वो मजनूँ हो कि राँझा हो
बदलते वक़्त में केवल सदा तब्दील होती है
रगों में दौड़ते ख़ूॅं की रवानी वो ही होती है
कहानी जो भी हो चाहे कहानी वो ही होती है
मुक़द्दर की रवानी में विरह सहना भी पड़ता है
हर इक पल साथ होकर भी जुदा रहना भी पड़ता है
किनारे पर खड़े सोहनी को बहते देखते रह कर
कभी महिवाल बनकर साथ में बहना भी पड़ता है
मुखौटों में छिपी दुनिया सयानी वो ही होती है
कहानी जो भी हो चाहे कहानी वो ही होती है















