तरन्नुम साज़ का मेरे उसे नासाज़ लगता हैमेरी ख़ामोशियों में भी उसे इक राज़ लगता हैख़ुदा अब बख़्श भी दे दिल को मेरे उल्फ़तें उस कीतुझे भी रास आता उस का ही अंदाज़ लगता है— Surendra Bhatia "Salil"