
इतनी ज़हमत कौन उठाए सन्नाटे से बात करे
ख़ुद अपने ज़ख़्मों से उलझे दर्द से दो दो हाथ करे
आँख उठा कर जब से तू ने उस बादल को देखा है
सावन में सूखा घू
में है फागुन में बरसात करे
— Sameer Goyal
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