लफ़्ज़ मेरे रौशनाई में डुबोती शा'इरीरोज़ इन पाषाण नयनों को भिगोती शा'इरीकह दिया बस अलविदा क्या आपने सोचा कभीहस्र क्या होता हमारा गर न होती शा'इरी— Sanya rai