"तुम"

मैं तुम पर मरता हूँ क्या मुझ पर मरोगी तुम
ये सफ़र नहीं आसान कैसे तय करोगी तुम
मैं जानता था ये मुझे फिर से तन्हा करोगी तुम
मेरा ये हाथ छोड़कर यूँ ही भटकती रहोगी तुम
तुम ख़ुद को न समझ पाई मुझे ख़ाक समझोगी तुम
चलो मैं तुम्हारी बात मान कर मिलने भी आ जाऊँगा
मुझ को ये बताओ फिर किस मुँह से मिलोगी तुम
इन हँसती आँखों को आँसू देकर मुस्कुराती हो
जाओ बद-दुआ है मेरी यूँ ही हॅंसती रहोगी तुम
ये जो मुझ पर बीती है मैं ख़ुश हूँ इस ग़म से
गर तुम पर बीती तो रो पड़ोगी तुम

— Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

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