Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

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Saurabh Chauhan 'Kohinoor' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Saurabh Chauhan 'Kohinoor''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

यारो मुझ को उस हर इक आँख में खटकना है जिस ने मेरे बाप को देख के नज़रें फेरी थी — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
मिलने तक का वक़्त नहीं उस के पास में देखो और वो शख़्स मुहब्बत की बात करता है मुझ सेे — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
जो भी मुझ सेे मिलता है मेरा हो जाता है ये मैं नहीं कहता हूँ ऐसा ये लोग कहते है — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
मेरे ख़्वाबों में आ कर मुझे मत सता अपना चेहरा दिखा मान जा मान जा — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
मिलने तक का वक़्त नहीं उस के पास में यारों और वो शख़्स मुहब्बत की बात करता है मुझ सेे — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
देखो इतनी मेहनत के बा'द भी कुछ न बन सके हम आख़िर मिट्टी ही होना था सो मिट्टी ही रहे हम — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
कब तलक तन्हा गुज़रेगी ये ज़िंदगी अब तो शादी रचा मान जा मान जा — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

Ghazal

सच को ऐसे गिराना नहीं चाहिए तेरा झूठा बहाना नहीं चाहिए नाक पर जब कभी बात अड़ जाए फिर हाथ उन सेे मिलाना नहीं चाहिए लड़कियों चोरी करना ग़लत बात है ऐसे दिल को चुराना नहीं चाहिए बेटियाँ गर हमारी सलामत नहीं हम को ऐसा ज़माना नहीं चाहिए गर मोहब्बत की क़स में वो खाता है तो कुछ भी उस सेे छुपाना नहीं चाहिए छोड़ दे हाथ तेरा मुसीबत में जो ऐसा रिश्ता बनाना नहीं चाहिए एक सच बोलने से तबाही मचे ऐसे सच को बताना नहीं चाहिए लाखों दुख झेलकर माँ ने पाला हमें माँ का दिल यूँँ दुखाना नहीं चाहिए मेरे वालिद हमेशा सलामत रहें मुझ को कोई ख़ज़ाना नहीं चाहिए — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'
मेरी जब भी कोई बात सँवरने लगती है मसलन बनते बनते बात किनारे लगती है ये सब कुछ वीराना सा है तेरे जाने से तेरे आने से मख़्लूक़ चहकने लगती है मैं जब भी लिखने लगता हूँ तेरे बारे में काग़ज़ पर तेरी तस्वीर उभरने लगती है बस इक मैं ही जानू तिरी छुअन के जादू को छूते ही मेरी तस्वीर महकने लगती है सारा आलम रौशन है बस तेरे होने से तेरे नूर से तो चाँदनी भी जलने लगती है बोसे का सुनते ही तो मुँह फुला लेती है वो कहता हूँ तो शादी बा'द का कहने लगती है देखो ऐसी लड़की से फ़ासला ही रखना तुम जो शान-ओ-शौक़त देख कर फिसलने लगती है — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'

Nazm

"मुहब्बत" मेरे आँसू कब ठिकाने लगेंगे इन्हें रुकने में ज़माने लगेंगे तुझे चाहा था इस क़दर मैं ने ख़ुद को ही दिए ये दर्द मैं ने मेरी मुहब्बत तुझे क्यूँँ रास न आई इतना रोया की साँस तक न आई दुआ है तेरी आँखों को भी कोई भाए तू इज़हार करे और वो तुझे ठुकराए तू इतनी रोए की तेरी आँखों का पानी सूख जाए मेरी बद-दुआ है तुझे भी किसी से मुहब्बत हो जाए मेरी तकलीफ़ तुझे तब समझ आएगी तो रोना तो चाहेगी मगर रो नहीं पाएगी अगर आँसू बहेंगे तो बे-हिसाब बहेंगे तू पोछती रहना मगर नहीं रुकेंगे मुहब्बत ठुकराने का दर्द तब तू जानेगी एक एक आँसू की क़ीमत तब तू पहचानेगी दुआ करेगी मेरी हाथों से ये मुहब्बत के लकीरें ही मिट जाएँ मेरी बद-दुआ है तुझे भी किसी से मुहब्बत हो जाए — Saurabh Chauhan 'Kohinoor'