@SaurabhChauhan
Saurabh Chauhan 'Kohinoor' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Saurabh Chauhan 'Kohinoor''s shayari and don't forget to save your favorite ones.
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यारो मुझको उस हर इक आँख मे खटकना है
जिसने मेरे बाप को देख के नज़रें फेरी थी
कुछ लोगों की सोच में भी जाले होते हैं
उन लोगों के तो दिल भी काले होते हैं
अक्सर मुझको साँप वही डसते हैं आकर
जो मैंने आस्तीन में पाले होते हैं
तेरी तस्वीर जब वो दिखाने लगे
हम भी धीरे से फिर मुस्कुराने लगे
होश खो ही दिया देख कर के तुझे
एक लम्हे में हम यूँ ठिकाने लगे
मिलने तक का वक़्त नहीं उस के पास में यारों
और वो शख़्स मुहब्बत की बात करता है मुझसे
मिलने तक का वक़्त नहीं उस के पास में देखो
और वो शख़्स मुहब्बत की बात करता है मुझसे
तेरे धोके से मेरी रवानी गई
पूरी होती सी इक वो कहानी गई
मेरा नुक़सान कैसे भरेगी बता
तुझको पाने में मेरी जवानी गई
जो भी मुझसे मिलता है मेरा हो जाता है
ये मैं नहीं कहता हूँ ऐसा ये लोग कहते है
है मुहब्बत मुझे ऐसी गुलनार से
जिसको होती है नफ़रत बड़ी प्यार से
मन मे डर है कि वो ठुकरा दे नइँ मुझे
इसलिए ही तो डरता हूँ इज़हार से
तेरे जाते ही मेरी रवानी गई
पूरी होती सी इक वो कहानी गई
मेरा नुक़सान कैसे भरेगी बता
तुझको पाने मे मेरी जवानी गई
मेरी छोटी सी दुनिया की रानी थी वो
इन लबों पर सजी इक कहानी थी वो
मैंने सोचा था ये दोस्ती थी वो बस
क्या पता था कि मेरी दिवानी थी वो
मैं बातों से छोटा बच्चा लगता हूँ
हाँ थोड़ा सा राह से भटका लगता हूँ
हँसती हुई वो कितनी प्यारी लगती है
मैं रोते हुए कितना अच्छा लगता हूँ
नन्ही कोमल कलियाँ जब भी सँवारी जाएँगी
बेटा बनकर इक दिन सब के ख़्वाब सजाएँगी
चार किताबें पढ़ने दो हर घर की बेटी को
कोख से बच आई हैं दहेज से भी बच जाऍंगी
हक़ीक़त है मैं जब जब गुज़रा हूँ तेरी गली से
कोई तो राब्ता लगता तिरी शाही गली से
मुहब्बत के किसी ने मानी पूछे मैं कह आया
कभी चक्कर लगे तो पूछना उसकी गली से
मैं वो सारे वादे निभाऊँगा
सपने पूरे करके दिखाऊँगा
लोग यहाँ तो घर को सजाते हैं
सुन मैं तेरी माँग सजाऊँगा
देखो ज़हर से ज़्यादा ताक़तवर ये मोहब्बत है
इसीलिए तो मुझको इस नाम से ही नफ़रत है
बोलो क्या इतना काफ़ी नइँ तबाह होने को
जो मेरी ख़्वाहिश है किसी और की हक़ीक़त है
देखो इतनी मेहनत के बाद भी कुछ न बन सके हम
आख़िर मिट्टी ही होना था सो मिट्टी ही रहे हम
सबको अपना बनाते देखे हैं
यूँ भरोसा जताते देखे हैं
धर्म के नाम पर सियासत है
झूठे गीता उठाते देखे हैं
मुझको यूँ आख़िरी विदा देना
कान में जौन गुनगुना देना
ये मुहब्बत में मरने वाला है
जो भी पूछे उसे बता देना