"बे-ख़बर"

ए जान ज़रा बचकर ही रहना
हम बद-नज़रों की बद-नज़री से
क्या तुम को ख़बर है क्या होता है
क्या तुम को गुमाँ तुम क्या होते हो
जब ज़ुल्फ़ तुम्हारे रुख़सारों पर
इक बार परेशाँ हो जाती है

— SHABAN NAZIR

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