मुहब्बत में ख़सारे हो रहे हैं
चुनाँचे हम तुम्हारे हो रहे हैं
सुना था इश्क़ में होता है ऐसा
मेरे भी अब जगारे हो रहे हैं
दुपट्टे से ज़रा ढक लो ये चेहरा
परेशाँ सब सितारे हो रहे हैं
फ़क़त तेरी कमी है ज़िन्दगी में
वगरना काम सारे हो रहे हैं
जिन्हें नफ़रत थी मेरे नाम से भी
वही सब अब हमारे हो रहे हैं
— Shadab khan















