apne honthon pe tabassum li.e vo kahtaa hai | अपने होंठों पे तबस्सुम लिए वो कहता है

  - Shajar Abbas

अपने होंठों पे तबस्सुम लिए वो कहता है
बे तकल्लुफ़ करो मुझसे जो कोई शिकवा है

कोई शीरीं है कोई हीर कोई लैला है
कोई फ़रहाद कोई क़ैस कोई राँझा है

जब से देखा है सनम ख़्वाब में सहरा मैंने
तब से दिल में तुझे खो देने का डर रहता है

ख़ूबसूरत है बहुत चेहरे से वो शख़्स मगर
है मुनाफ़िक़ है फ़रेबी वो मियाँ झूठा है

चार चीज़े हैं मेरे कमरे में रब ख़ैर करे
मैं हूँ तन्हाई है ये रस्सी है और पंखा है

मेरे माबूद इसे उम्र-ए-अबद दे देना
शाख़-ए-दिल पर ये मोहब्बत का जो गुल खिलता है

अच्छा अच्छा ये बता मुझको ज़रा जान-ए-वफ़ा
तू जिसे चाहती है मुझसे हसीं लड़का है

देखकर हाथ मेरा मुझसे नजूमी ने कहा
तेरी तक़दीर में रुसवाई है और सहरा है

गुल का बोसा मैं लिया करता हूँ गुलशन में शजर
और ये देख के ख़ारों का जिगर जलता है

तैश में आन के सखियों से ये बोली इक दिन
मैं शजर की हूँ सुनो और शजर मेरा है

उसने ये कह के शजर दूरी बना ली मुझसे
कौन रुसवा-ए-ज़माना से गले मिलता है

  - Shajar Abbas

Alone Shayari

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