dekhkar phoolon ki aur bhavron ki haalat titliyan | देखकर फूलों की और भँवरों की हालत तितलियाँ

  - Shajar Abbas

देखकर फूलों की और भँवरों की हालत तितलियाँ
सब की सब करने लगीं गुलशन से हिजरत तितलियाँ

बाग़बाँ होती हैं यूँँ गुलशन की ज़ीनत तितलियाँ
फूलों पे लगती हैं बैठी ख़ूबसूरत तितलियाँ

इक हसीं मंज़र था ख़ुश थे सारे भँवरे बाग़बाँ
आईं जब फूलों की करने को अयादत तितलियाँ

नोच डाला है किसी ज़ालिम ने इक गुल का बदन
कर रही हैं बाग़बाँ से सब शिकायत तितलियाँ

ख़ार बनकर आँखों में सय्याद के चुभने लगीं
जब बढ़ाने लग गईं फूलों से क़ुर्बत तितलियाँ

फूल कलियाँ करते हैं सुनकर तबस्सुम ज़ोर से
करती हैं गुलशन में जब भँवरे की मिदहत तितलियाँ

आन कर फूलों को तुम सब प्यार से चूमा करो
रोज़ करती हैं ये भँवरों को नसीहत तितलियाँ

फूल करते हैं मोहब्बत तितलियों से बाग़बाँ
और यहाँ फूलों से करती हैं मोहब्बत तितलियाँ

क़ैद में सय्याद की सब अपने ज़ख़्मी तन के साथ
दिल में लेके बैठी हैं उड़ने की हसरत तितलियाँ

बाग़बाँ कहने लगा सय्याद से मत ले के जा
सह नहीं पाएँगी ये गुलशन से फ़ुर्क़त तितलियाँ

रफ़्ता-रफ़्ता सब शजर कुम्हला गए गुल गिर गए
रफ़्ता-रफ़्ता हो गईं गुलशन से रुख़्सत तितलियाँ

  - Shajar Abbas

Nature Shayari

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