dikhte hain hamko husn ke jauhar kabhi kabhi | दिखते हैं हमको हुस्न के जौहर कभी कभी

  - Shajar Abbas

दिखते हैं हमको हुस्न के जौहर कभी कभी
होती है उनकी दीद मयस्सर कभी कभी

फ़ुर्क़त के बाद देखिए दिन भर कभी कभी
खाते फिरे हैं ठोकरे दर दर कभी कभी

दिल ज़ख़्मी हो के सीने में रगड़े है एडियाँ
आँखें बने हैं ख़ूँ का समुंदर कभी कभी

यादें दिमाग़ कुंद किया करती हैं तेरी
चुभता है हिज्र सीने के अन्दर कभी कभी

ऐसा न हो जहाँ से गुज़र जाएँ हम शजर
अपनी नज़र किया करो हम पर कभी कभी

  - Shajar Abbas

Environment Shayari

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