munkir-e-ishq ko is tarah jala rakha hai | मुनकिर-ए-इश्क़ को इस तरह जला रक्खा है

  - Shajar Abbas

मुनकिर-ए-इश्क़ को इस तरह जला रक्खा है
हमने होंठों पे तेरा नाम सजा रक्खा है

दिल गुलिस्तान में ख़ारों का जला रक्खा है
फूल ने फूल को सीने से लगा रक्खा है

उसको अल्लाह रखे रंज-ओ-बला से महफूज़
जिसने जन्नत की परी नाम तेरा रक्खा है

मेरे हम 'उम्र के लड़कों के लिए आँखों में
उसने देखो ज़रा मय ख़ाना बना रक्खा है

जल रहा है मेरा दिल यार-ए-ग़म-ए-फ़ुर्क़त में
सबको लगता है शजर पर ये दिया रक्खा है

  - Shajar Abbas

Kashmir Shayari

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