parwardigaar karta hai rahmat qubool kar | परवरदीगार करता है रहमत क़ुबूल कर

  - Shajar Abbas

परवरदीगार करता है रहमत क़ुबूल कर
ऐ ख़ुश नसब तू इज़्ज़त-ओ-शोहरत क़ुबूल कर

साए में आ शजर के तू राहत क़ुबूल कर
चाहत क़ुबूल कर ये मोहब्बत क़ुबूल कर

उल्फ़त क़ुबूल कर ये अज़ीयत क़ुबूल कर
अच्छी बुरी हमारी हर आदत क़ुबूल कर

हम दर्द बनने वाले मेरे मेरी बात सुन
मुझको गले लगाने की ज़हमत क़ुबूल कर

क़ासिद को दर पे देख के हैरत ज़दा न हो
भेजा है ख़त जो मैंने मेरा ख़त क़ुबूल कर

दिल कह रहा है फूल को कर लूँ शजर क़ुबूल
लेकिन दिमाग़ कहता है तू मत क़ुबूल कर

  - Shajar Abbas

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