गुलशन-ए-क़ल्ब में मोहब्बत काख़ूब-सूरत सा फिर गुलाब खिलेबे वफ़ा शख़्स ये दुआ है मेरीउम्र भर तुझ को बे वफ़ाई मिले— Shajar Abbas