हम अपने फ़न को सहारा 'शजर' बनाएँगेग़ज़ल में लिख के ज़माने को ग़म सुनाएँगेउसे बिठायेंगे हँसकर हम उस की डोली मेंजो वा'दा हम ने किया है उसे निभाएँगे— Shajar Abbas