कहता है ये इंसान से इंसान मुबारकहम क्यूँ न कहें आपसे फिर जान मुबारकआती है सदा दिल से शजर मेरे निकलकरहो जान-ए-तमन्ना को ये रमज़ान मुबारक— Shajar Abbas