मोहब्बत जो समझते हैं
वहीं हम को समझते हैं
फ़क़त अब हम हक़ीकत भी
यूँ ख़्वाबों को समझते हैं
भले को बस भला जाने
बुरे सब को समझते हैं
फ़लक के चाँद तारे अब
सभी उन को समझते हैं
कहो गर वो मिरे हैं तो
मुझे क्या वो समझते हैं
— Shams Amiruddin
वहीं हम को समझते हैं
फ़क़त अब हम हक़ीकत भी
यूँ ख़्वाबों को समझते हैं
भले को बस भला जाने
बुरे सब को समझते हैं
फ़लक के चाँद तारे अब
सभी उन को समझते हैं
कहो गर वो मिरे हैं तो
मुझे क्या वो समझते हैं
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