बची तुझ
में अगर ग़ैरत नहीं है
चलो फिर मुझ को भी दिक़्क़त नहीं है
तुम्हारे बा'द चाहूँगा मैं किस को
तुम्हारी याद से फ़ुरसत नहीं है
वो ग़ैरों से मुख़ातिब हो रहा है
मुहब्बत में वो अब शिद्दत नहीं है
तुझे मैं भूल कर चाहूँ किसी को
मेरी इतनी भी तो हिम्मत नहीं है
बदन के प्रेमियों से पूछना आप
तुम्हारे घर में क्या औरत नहीं है
— Manoj Sharma "Chandan"















