"किरदार"

वो तो लोग कह रहे हैं, मुझ से कुछ नहीं बना
पर वक़्त लिख रहा है अभी मेरा फ़लसफ़ा

ये शाम ढलती लग रही है मेरी सब को जो
पर मैं अपनी नींव बनाने में लगा हूँ

अब लौट न पाऊँगा सब को है पूरा यक़ीन
दरिया समेट लूँ तो अपने साथ लाऊँगा

तुम देख रहे हो मेरे कपड़े मेरी हालत
और यहाँ किरदार अपना बुन रहा हूँ मैं

— Shashank Tripathi

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