दर्दस दामन छुड़ाना आ गया
या'नी फिर से मुस्कुराना आ गया
आप हासिल हैं जिसे ऐ दिल-नशीं
हाथ में उस के ख़ज़ाना आ गया
आप के तेवर बदल ही जाएँगे
चंद पैसे जो कमाना आ गया
आप तो मासूम लगते हैं बहुत
कैसे फिर दिल ये दुखाना आ गया
देखिए मेरा सफ़र तो ख़त्म है
अब फ़क़त मेरा ठिकाना आ गया
बाप के आराम के दिन आ गए
बेटे को आख़िर कमाना आ गया
आपका आँचल मिला है धूप में
आज सर पे शामियाना आ गया
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by shaan manral
our suggestion based on shaan manral
As you were reading Gham Shayari Shayari