hai bas is jism ko saanson ka kabristaan karna | है बस इस जिस्म को साँसों का कब्रिस्तान करना

  - SHIV SAFAR

है बस इस जिस्म को साँसों का कब्रिस्तान करना
बहुत मुश्किल नहीं होता है ग़म आसान करना

बहुत से दिल जगह देने को थे तैयार मुझको
प मैंने ही न चाहा ज़ीस्त को ज़िंदान करना

वफ़ा को तुम जहाँ में ढूँढते फिरते हो क्यूँँकर
कभी मौक़ा मिले तो ख़ुद से भी पहचान करना

मैं ख़बरें ख़ुदकुशी की सुन के था हैरत में लेकिन
हुआ जब 'इश्क़ तो आसाँ लगा हैरान करना

सुकूँ से देख लो पहले मुझे तुम राख बनते
फिर उसके बाद तुम अपनी ख़ुशी ऐलान करना

लगा के सीने से नेज़ा बढ़ा के दिल की जानिब
हमें आता है अपने आप पर एहसान करना

फ़क़त दुनिया से तेरी दिल लगी जाइज़ नहीं है
हमारे वास्ते भी मौत के इम्कान कर ना

कभी तुझको लगे गर प्यार मैंने कम दिया है
तो फिर तेरे दिए ज़ख़्मों को तू मीज़ान करना

सुकूँ आराम जैसी शय मुझे मिलती भी कैसे
‘सफ़र’ होने का मतलब ख़ुद को है हल्कान करना

  - SHIV SAFAR

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