सुनो अब और ये जबरन निभाना प्यार छोड़ो यार
बनाना वो बहाने भी नए हर बार छोड़ो यार
मेरा गर क़त्ल करना हो तो तेरा 'इश्क़ है काफ़ी
नहीं जचते तेरे हाथों में ये हथियार छोड़ो यार
क़रीब आओ हदों को तोड़, दो से एक हो जाएँ
ये मौसम सर्दियों का है सो अब इनकार छोड़ो यार
मुझे बाहों में भरके एक पल में मार डालो ना
कि अब हर बार नज़रों से ये करना वार छोड़ो यार
किसी को मां के आंचल में कभी मंज़िल नहीं मिलती
अगर सच मुच है पाना कुछ तो फिर घरबार छोड़ो यार
नए कानून गढ़ने से बलात्कारी न सुधरेंगे
उठा लो चप्पलें जूतें कि अब सरकार छोड़ो यार
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