उसके भी दिल से शौक़िया धोका न जाएगा
ख़ुद को भी प्यार करने से रोका न जाएगा
मर्ज़ी है, कुर्सी, रस्सी है, सब इंतिज़ाम है
लेकिन भरोसा क्या है कि टोका न जाएगा
कहता हूॅं तजरबे से सुकूँ कार-ए-''इश्क़ में
बस एक का ही जाएगा दो का न जाएगा
वो शहर वो गली वो मकाँ तक भुला भी दूॅं
पर ज़ेहन से मेरे वो झरोका न जाएगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by SHIV SAFAR
our suggestion based on SHIV SAFAR
As you were reading Sukoon Shayari Shayari