दिन भुलाया मगर रात पहरा रहाज़ख़्म भरने लगे दाग़ गहरा रहाइस सफ़र में किसे हम सफ़र हम कहेंसब गए छोड़ कर वक़्त ठहरा रहा— Sandeep Rajput