हुई है क्या ख़ता जाने
चले नासेह समझाने
गए थे बाब-ए-उल्फ़त को
वफ़ाओं का मज़ा पाने
हुकुम होता ग़ज़ल का है
सुना देते है अफ़साने
— Sumit Panchal
चले नासेह समझाने
गए थे बाब-ए-उल्फ़त को
वफ़ाओं का मज़ा पाने
हुकुम होता ग़ज़ल का है
सुना देते है अफ़साने
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