
कुछ देर यहाँ बैठो वो चाँद झुलस जाए
फिर ख़ुद ही कहे ख़ुद से ये दीद मुबारक हो
जिस को भी मिलो हँस के ये एक हिदायत दो
गुड़िया ये उसे कहना तुम ईद मुबारक हो
— Subodh Sharma "Subh"
Other sher from the same pen
Shers of chaand.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling