
तू बता कैसे मैं ख़ुद को इस तरह से बाँट लूँ
एक चुनना है मुझे फिर क्यूँ दहाई छाँट लूँ
वो गले लग कर मुझे रोता है 'शुभ' हर बार तो
पहले ग़ुस्सा कर चुका हूँ अब ज़रा सा डाँट लूँ
— Subodh Sharma "Subh"
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