मंज़िल तक चलकर जाना है
रुकना यानी मर जाना है
भटके राही की है ख़्वाहिश
उसको केवल घर जाना है
कायरता से जीवन जीने से
अच्छा तो मर जाना है
नीचे जिसको गिरा रहे तुम
उसको बस ऊपर जाना है
निकले गर मोती से आँसू
तो इक सागर भर जाना है
राम नाम केवल जीवन धन
भज ले इस सेे तर जाना है
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