मंज़िल तक चल कर जाना है
रुकना या'नी मर जाना है
भटके राही की है ख़्वाहिश
उस को केवल घर जाना है
कायरता से जीवन जीने से
अच्छा तो मर जाना है
नीचे जिस को गिरा रहे तुम
उस को बस ऊपर जाना है
निकले गर मोती से आँसू
तो इक सागर भर जाना है
राम नाम केवल जीवन धन
भज ले इस से तर जाना है
— SHIVANKIT TIWARI "SHIVA"















