
मेरा दिल तुम शौक़ से तोड़ो एक तजुर्बा और सही
जलता दीपक आके बुझा दो दिल में अँधेरा और सही
भीड़ में तन्हा रहता हूँ मैं मंज़र आ कर देख लो ये
लाख तमाशे देखे होंगे एक तमाशा और सही
— Tarun Bharadwaj
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