निगाहों से ये जो इशारे हुए हैं

इशारों ने दीवाने मारे हुए हैं

कई हुस्न वाले मुझे चाहते थे
मगर मेरी जाँ हम तुम्हारे हुए हैं

तेरे लौटने की ख़बर थी मिली जब
सड़क तब से हम यूँ निहारे हुए हैं

हुई तुम हो किशमिश असर है नगर का
इधर हिज्र में हम छुहारे हुए हैं

— Sachin kumar

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