उन की जब भी बात चली
आँखों से बरसात चली
उस का उतना नाम हुआ
जिस की जितनी बात चली
इक दिन धोखे यार मिले
सबकी मुझ पर घात चली
सब से छोटा याम ढला
सब से लंबी रात चली
किस का पूरा इश्क़ यहाँ
सब के ऊपर जात चली
उतनी उम्दा जीत कहाँ
जितनी उम्दा मात चली
— Sarvesh Pandey















